♠ महानता का रहस्य ♠

चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस अपने ज्ञान और बुद्धिमता के लिए विश्वविख्यात थे। एक दिन चीन के सम्राट ने उन्हें अपने दरबार में आमंत्रित किया। जब कन्फ्यूशियस दरबार में पहुंचे तो सम्राट ने उनका अभिवादन कर उन्हें उपयुक्त आसन प्रदान किया। जब सभी लोग बैठ गए तो सम्राट ने कन्फ्यूशियस से कहा- मै चाहता हूं कि आप मुझे उस व्यक्ति के पास ले चलें, जो महान कहलाता हो।

कन्फ्यूशियस बोले- '' महाराज, आपसे अधिक महान कौन हो सकता है। आप सत्य को जानने की भावना रखते हैं और जो ऐसी उच्च भावना रखे, वही महान है।''

उनकी बात सुनकर सम्राट ने कहा - '' किंतु मै सोचता हूं कि मुझसे भी महान कोई तो होगा। ''

कन्फ्यूशियस बोले- ''आपसे अधिक महान मै हूं क्योकि सत्य के प्रति मेरा अनुराग है। ''

सम्राट ने फिर प्रश्न उठाया - ''आपसे भी अधिक महान कौन है?''

तब कन्फ्यूशियस ने कहा- यह तो ढूढ़ना पड़ेगा। इतना कहकर वे सम्राट को लेकर चल पड़े। कुछ दूर चलने पर एक वृद्ध कुआं खोदता दिखाई दिया।

उसे देखकर कन्फ्यूशियस बोले - ''सम्राट, मुझसे भी अधिक महान यह वृद्ध है। इसकी काफी आयु बीत चुकी है। शरीर से शिथिल भी हो गया है, फिर भी कुआं खोद रहा है। इसमें परोपकार की भावना है और जिसमें यह भावना हो वही सबसे महान है। ''

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