♠ जगदीश चन्द्र बोझ का आत्मविश्वास ♠



जगदीश चन्द्र बोझ महान भारतीय वैज्ञानिक थे। भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में उनकी ख्याति थी। एक बार वे वैज्ञानिकों के सम्मेलन में भाग लेने इंग्लैंड गए। विश्वभर के वैज्ञानिक वहां आए हुए थे। बोझ से सभी मिलना चाहते थे और उन्हें सुनना भी चाहते थे।

सम्मेलन का शुभारंभ होने के बाद सबसे पहले बसु को ही आमंत्रित किया गया। संयोगवश उन्होंने उन दिनों पौधों की संवेदनशीलता पर सफल प्रयोग किया था। उसी का प्रदर्शन उन्हें उस सम्मेलन में करना था।

उन्होंने एक पौधे को विषैला इंजेक्शन लगाया। ऐसा कर वे यह सिद्ध करना चाहते थे कि पौधे पर इसकी प्रतिक्रिया अवश्य होती है किन्तु इंजेक्शन लगाने पर पौधे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। यह देख बसु ने तत्काल कहा - जब पौधे पर इसका प्रभाव नहीं हुआ तो मुझ पर भी नहीं होगा। यह कहकर उन्होंने विष का दूसरा इंजेक्शन अपने हाथ में लगा लिया। यह देख सभी आश्चर्यचकित रह गए। इससे भी अधिक आश्चर्य उन्हें तब हुआ, जब बसु को भी कुछ नहीं हुआ। तत्पश्चात बसु ने पौधे को दूसरा इंजेक्शन लगाया तो वह तुरंत मुरझा गया।

वस्तुतः हुआ यह कि बोझ ने भूलवश पहले किसी अन्य दवा का इंजेक्शन लगा दिया था। इसलिए पौधे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई किंतु उनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा था, जिसके फलस्वरूप उस सम्मेलन में उन्होंने भरपूर प्रशंसा पाई।

अर्थात जब व्यक्ति में आत्मविश्वास हो तो जटिल परिस्थितियां भी आसान हो जाती हैं और सफलता के मार्ग खुल जाते हैं। इसलिए अपनी बुद्धि और क्षमता पर विश्वास रखते हुए किसी भी स्थिति का डटकर सामना करें।

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