♠ वीर अभिमन्यु ♠

♥ → अंत तक पढना दोस्तो l मै यकिन दिलाता हुं कि आप इनमे से  कुछ बेहतर जान पाओगे ♥

वीर अभिमन्यु ,एक ऐसा व्यक्तित्व
जिसकी वीरता ,पौरुष और मृत्यु ने तेहरवें
दिन महाभारत के युद्ध
की दिशा को बदल डाला|युद्ध के इस
तेहरवें दिन ने न केवल युद्ध के तात्कालिक
नियमो को प्रभावित किया अपितु
आज तक के सभी युद्धों में युद्ध
नियमो की परिभाषा को पूर्णतः
समाप्त कर दिया |महाभारत के इस
विराट युद्ध से पहले ,युद्ध ,नियमो के
अधीन लड़ा जाता था|जिसके अंतर्गत
सूर्य उदय से पूर्व और सूर्य अस्त के पश्चात्
युद्ध लड़ना और युद्ध सबंधी कोई
भी क्रियाकलाप किसी योद्धा के
कायर होने का सूचक था और युद्ध में
निहत्थे योद्धा पर शस्त्र या अस्त्र
चलाना किसी योद्धा के कायर होने
का प्रमाण था|पर आज की युद्ध
नीति में इन सभी नियमो का कोई अवशेष
नहीं मिलता है|और ये
परम्परा इसी महासमर के तेहरवें दिन के
घटनाक्रम की देन है|
अभिमन्यु का जन्म अर्जुन
की पत्नी सुभद्रा की कोख से हुआ था|
सुभद्रा,जो कृष्ण और बलराम की बहन
थी,एक अत्यंत आकर्षक और अस्त्र-शस्त्र
चलने में निपुण युवती थी|अर्जुन ने उसे रेवतक
पर्वत पर यादवों के उत्सव में देखा और उसे
मन ही मन पसंद कर लिया|बलराम
सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से
करना चाहते थे पर कृष्ण को अपनी प्रिय
बहन का विवाह दुर्योधन जैसे
आततायी के साथ बर्दाश्त
नहीं था अतः उन्होंने अर्जुन
की इच्छा को जानते हुए उसे सुभद्रा से
विवाह करने हेतु सुभद्रा का अपहरण करने
की सलाह दी और अर्जुन के लिए अपहरण में
प्रयुक्त रथ और अस्त्रों-
शस्त्रों की व्यवस्था की|अर्जुन ने
सुभद्रा का अपहरण कर उससे विवाह
किया|पर इस पूरे प्रसंग में प्राचीन भारत
की विवाह
सम्बन्धी स्वछंदता का आभास
मिलता है|क्योकि कुंती कृष्ण की बुआ
थी और अर्जुन उसका बुआ पुत्र|पर फिर
भी कृष्ण ने अपनी बहन का विवाह अर्जुन
से करने में योगदान दिया,पर आज के
हिन्दू समाज में ये विवाह अमान्य
माना जाता|
अभिमन्यु जब सुभद्रा की कोख में था तब
अर्जुन ने सुभद्रा को युद्ध में उपयोग आने
वाली 'चक्रव्यूह ' रणनीति
का सविस्तार वर्णन
सुनाया क्योकि उस समय केवल गुरु
द्रोण,स्वयं अर्जुन और वासुदेव कृष्ण
ही 'चक्रव्यूह ' में अंदर घुसना और उससे
बाहर निकलना जानते थे|सुभद्रा ने
चक्रव्यूह को तोड़ अंदर जाने की बात बड़े
ध्यान से सुनी जिससे उसके गर्भ में पल रहे
शिशु ने भी ग्रहण कर लिया पर जब अर्जुन
उसे चक्रव्यूह से बाहर आने का मार्ग बताने
लगा तब सुभद्रा को नींद आ गयी जिससे
अभिमन्यु केवल अंदर जाने
का रास्ता ही जान पाया|
अभिमन्यु के जन्म के पश्चात्
पांडवों को १२ वर्ष का वनवास और एक
वर्ष का अज्ञातवास
पूरा करना था अतः अभिमन्यु
द्वारका में वासुदेव कृष्ण के सानिध्य में
पला-बढ़ा|अभिमन्यु में सदैव वासुदेव कृष्ण
से चक्रव्यूह के पूरे चक्र को सीखने
की कोशिश की पर वासुदेव ने उसे
कभी बाद में तो कभी अपने पिता से
सीखने को कहा|अभिमन्यु का विवाह
मत्स्यराज की पुत्री उत्तरा से हुआ |
उत्तरा अज्ञातवास के दौरान अर्जुन
की शिष्या थी|
अभिमन्यु ,वासुदेव कृष्ण का भांजा और
अर्जुन का पुत्र तो था ही पर उसमे अदभुत
युद्ध कला थी जिसके दम पर वह
अकेला ही कई सेनाओ पर भारी था|
जयसहिंता के अनुसार युद्ध के तेहरवें दिन
कौरव सेना के प्रधान सेनापति आचार्य
द्रोण ने युधिष्ठिर को बंदी बनाने
का विचार रखा ताकि युद्ध समाप्त
हो जाये और पांडव हार जाये
अतः उन्होंने युद्ध के भयंकरतम व्यूहों में एक
'चक्रव्यूह ' की रचना करने का विचार
किया|वैसे युद्ध में कई युद्ध व्यूह उपयोग आते
थे जैसे "सर्पव्यूह","कुर्मव्यूह" आदि पर
'चक्रव्यूह ' सर्वाधिक भयंकर और दुर्जेय
था|परन्तु पांडवों में अर्जुन और
उनका सारथि मधुसूदन प्रत्येक व्यूह
को तोडना जानते थे चाहे वो 'चक्रव्यूह '
क्यों न हो|अतः गुरु द्रोणाचार्य और
दुर्योधन ने मिलकर सुशर्मा और उसके भाई
को अर्जुन युद्ध लड़ते लड़ते उसे शेष पांडवो से
दूर ले जाने के लिए कहा|
तेहरवे दिन सुबह सुशर्मा अर्जुन को लड़ते
लड़ते दूर ले गया और अर्जुन
की अनुपस्थिति में गुरु द्रोण ने युधिष्ठिर
को बंदी बनाने हेतु "चक्रव्यूह " रच डाला |
पर वीर बालक अभिमन्यु ने,जिसकी वय
बमुश्किल १६-१७ वर्ष होगी , चक्रव्यूह
को तोड़ने की कला का रहस्योदघाटन
करते हुए पांडव सेना की कमान संभाली|
उसने अपने ताऊश्री युधिष्ठिर और भीम
को अपने पीछे आने को कहा और 'चक्रव्यूह
' में घुस गया पर सिन्धु नरेश राजा
जयद्रथ, जिसे एक दिन अर्जुन के
बिना पूरी पांडव सेना को रोक सकने
का वरदान प्राप्त था,ने
युधिष्ठिर ,भीम इत्यादि को रोक
लिया और अभिमन्यु को चक्रव्यूह में जाने
दिया|अभिमन्यु में चक्रव्यूह को भेद
डाला था और इसके प्रहरी दुर्योधन पुत्र
लक्ष्मण और दुशासन पुत्र को मार
डाला था |इसके उपरांत उसने अश्मक
पुत्र,शल्य पुत्र
रुध्मराथा ,द्रिघ्लोचन ,कुन्दवेदी ,शुसेना,
वस्तिय आदि कई वीरो को यमराज के
पास पंहुचा दिया|उसने द्वन्द युद्ध में कर्ण
जैसे महारथी को घायल कर दिया और
अश्वत्थामा ,क्रिपाचार्य और
भूरिश्रवा जैसे रथियो को पराजित कर
दिया|पर अपने प्रिय पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु
से बोखलाए दुर्योधन ने खतरे को भांपते हुए
सभी महारथियों को बालक अभिमन्यु
पर एक साथ प्रहार करने को कहा जिसके
परिणामस्वरूप
कर्ण,अश्वत्थामा ,भूरिश्रवा ,
क्रिपाचार्य,द्रोणाचार्य ,शल्य,
दुर्योधन,दुशासन जैसे महारथियों ने एक
साथ अभिमन्यु पर प्रहार किया और उसके
अस्त्र-शस्त्र समाप्त करवा दिए|फिर
कर्ण ने उस बालक के रथ को तीर से तोड़
डाला और उस निहत्थे बालक पर
सभी महारथी एक साथ टूट पड़े|
वो निहत्था बालक रक्त की अंतिम बूँद
तक इन महारथियों से रथ के पहिये
को उठा कर लड़ा पर तलवारों ने
उसकी जान ले ली|और फिर जयद्रथ ने
बालक अभिमन्यु के शव को पाँव से
मारा |"यह सब उसी प्रकार से था जैसे एक
सिंह को सौ सियारों ने घेर कर मार
डाला और फिर उस बहादुरी का जश्न
मनाया हो|"
पर जो भी हो बालक अभिमन्यु
की हत्या ने युद्ध नियमो की बलि ले
ली|
जिसका ज्यादा खामियाजा कौरवों
ने ही भुगता क्योकि कर्ण ,
द्रोणाचार्य ,दुशासन,और दुर्योधन
का वध युद्ध नियमो की इसी बलि के भेट
चढ़ा क्योकि जब अधर्म
अपनी पूरी नीचता पर उतर आता है तब
वासुदेव कृष्ण जैसे नीतिज्ञ भी अधर्म
को उसकी औकात दिखा ही देता है|
वैसे अभिमन्यु वध महारथी कर्ण और गुरु
द्रोणाचार्य के जीवन में कलंक साबित
हुआ और इसी घटना ने इन
महारथियों की मृत्यु का मार्ग प्रशस्त
किया l कर्ण वध और द्रोणाचार्य वध
को इतिहास अभिमन्यु वध के पश्चात्
ही तो उचित मानता!!!!
वीर अभिमन्यु को मेरा सदर नमन|
धन्यवाद|

♠ रावण का चमत्कार या राम का पावर? ♠

(जरूर पढेँ.. एक हास्य रस की सस्पेँश कथा)
.
.
श्री राम के नाम से पत्थरो के तैरने की news जब लंका पहुँची , तब वहाँ की public में काफी gossip हुआ कि भैया जिसके नाम से ही पत्थर तैरने लगें, वो आदमी क्या गज़ब होगा।

इस तरह की बेकार की अफ़वाहों से परेशान
रावण ने तैश में आकर announce करवा दिया कि कल रावण के नाम लिखे हुए पत्थर भी पानी में तिराये जायेंगे। और अगले दिन लंका में public holiday declare कर दिया गया।

निश्चित दिन और समय पर सारी population रावण का चमत्कार देखने पहुँच गयी। Set time पर रावण अपने भाई - बँधुओं , पत्नियों तथा staff के साथ वहाँ पहुँचे और एक भारी से पत्थर पर उनका नाम लिखा गया।

Labor लोगों ने पत्थर उठाया और उसे समुद्र में डाल दिया -- पत्थर सीधा पानी के भीतर !

सारी public इस सब को साँस रोके देख रहे थी
जबकी रावण लगातार मन ही मन में मँत्रोच्चारण कर रहे थे। अचानक, पत्थर वापस surface पर आया और तैरने लगा। Public पागल हो गयी , और 'लँकेश की जय' के कानफोड़ू नारों ने आसमान को गुँजायमान कर दिया।

एक public celebration के बाद रावण अपने लाव लश्कर के साथ वापस अपने महल चले गये और public को भरोसा हो गया कि ये राम तो बस ऐसे ही हैं पत्थर तो हमारे महाराज रावण के नाम से भी तिरते हैं। पर उसी रात को मँदोदरी ने notice किया कि रावण bed में लेटे हुए बस ceiling को घूरे जा रहे थे।

“ क्या हुआ स्वामी ? फिर से acidity के
कारण नींद नहीं आ रही क्या ?”

eno दराज मे पडी है ले कर आऊँ ? -
मँदोदरी ने पूछा।

“ मँदु ! रहने दो , आज तो इज़्ज़त बस लुटते लुटते
बच गयी। आइन्दा से ऐसे experiment नहीं करूंगा। " ceiling को लगातार घूर
रहे रावण ने जवाब दिया।

मँदोदरी चौंक कर उठी और बोली , “ ऐसा क्या हो गया स्वामी ?” रावण ने अपने सर के नीचे से हाथ निकाला और छाती पर रखा , “ वो आज सुबह
याद है पत्थर तैरा था ?” मँदोदरी ने एक curious
smile के साथ हाँ मे सर हिलाया।

“ पत्थर जब पानी में नीचे गया था , उसके साथ साथ मेरी साँस भी नीचे चली गयी थी।
" रावण ने कहा।

इसपर confused मँदोदरी ने कहा , “ पर पत्थर वापस ऊपर भी तो आ गया था ना । वैसे ऐसा कौन सा मँत्र पढ़ रहे थे आप जिससे पानी में नीचे गया पत्थर वापस आकर तैरने लगा ?”

इस पर रावण ने एक लम्बी साँस ली और बोले ,
“ मँत्र-वँत्र कुछ नहीं पढ़ रहा था बल्कि बार बार
बोल रहा था कि,

'हे पत्थर ! तुझे राम की कसम, PLEASE डूबियो मत भाई !! "
.
राम नाम मेँ है दम !!
बोलो
जय श्री राम !!
जय श्री राम !!

♠ अहंकार ♠

एक बार अर्जुन को अहंकार
हो गया कि वही भगवान के सबसे
बड़े भक्त हैं। उनकी इस
भावना को श्रीकृष्ण ने समझ लिया।
एक दिन वह अर्जुन को अपने साथ
घुमाने ले गए।

रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण
से हुई। उसका व्यवहार
थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास
खा रहा था और उसकी कमर से
तलवार लटक रही थी।

अर्जुन ने उससे पूछा, ‘आप तो अहिंसा के
पुजारी हैं। जीव हिंसा के भय से
सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते
हैं। लेकिन फिर हिंसा का यह
उपकरण तलवार क्यों आपके साथ
है?’

ब्राह्मण ने जवाब दिया, ‘मैं कुछ
लोगों को दंडित करना चाहता हूं।’
‘ आपके शत्रु कौन हैं?’ अर्जुन ने
जिज्ञासा जाहिर की। ब्राह्मण ने
कहा, ‘मैं चार लोगों को खोज रहा हूं,
ताकि उनसे अपना हिसाब चुकता कर
सकूं। सबसे पहले तो मुझे नारद
की तलाश है। नारद मेरे प्रभु
को आराम नहीं करने देते,
सदा भजन-कीर्तन कर उन्हें जागृत
रखते हैं। फिर मैं द्रौपदी पर भी बहुत
क्रोधित हूं। उसने मेरे प्रभु को ठीक
उसी समय पुकारा, जब वह भोजन
करने बैठे थे। उन्हें तत्काल
खाना छोड़
पांडवों को दुर्वासा ऋषि के श्राप से
बचाने जाना पड़ा।
उसकी धृष्टता तो देखए  उसने
मेरे भगवान
को जूठा खाना खिलाया।’

‘आपका तीसरा शत्रु कौन है?’
अर्जुन ने पूछा।

‘ वह है हृदयहीन प्रह्लाद। उस
निर्दयी ने मेरे प्रभु को गरम तेल के
कड़ाहे में प्रविष्ट कराया, हाथी के
पैरों तले कुचलवाया और अंत में खंभे
से प्रकट होने के लिए विवश किया।
और चौथा शत्रु है अर्जुन।
उसकी दुष्टता देखिए। उसने मेरे
भगवान को अपना सारथी बना डाला।
उसे भगवान की असुविधा का तनिक
भी ध्यान नहीं रहा। कितना कष्ट
हुआ होगा मेरे प्रभु को।’ यह कहते
ही ब्राह्मण की आंखों में आंसू आ
गए।

यह देख अर्जुन का घमंड चूर-
चूर हो गया। उसने श्रीकृष्ण से
क्षमा मांगते हुए कहा, ‘मान
गया प्रभु, इस संसार में न जाने
आपके कितने तरह के भक्त हैं। मैं
तो कुछ भी नहीं हूं।’

♠ જેવું અન્ન તેવું મન ♠

ભીષ્મ પિતામહ બાણશૈયા પર પડેલા હતા ત્યારે યુધિષ્ઠિર તેમની પાસે ધર્મનું જ્ઞાન મેળવવા ગયા.તેઓ ઉપદેશ આપી રહ્યા હતા તે દરમિયાન દ્રૌપદીને હસવું આવી ગયું.

ભિષ્મે પૂછ્યું, ''દીકરી તું આટલી શીલવંતી છે છતાં અસમય કેમ હસી રહી છે? ''

દ્રૌપદીએ કહ્યું ''પિતામહ અપરાધ ક્ષમા કરો પરંતુ મારા મનમાં એક વિચાર આવ્યો કે આપ અત્યંત જ્ઞાની છો અને અત્યારે ધર્મોપદેશ આપી રહ્યા છો તો ભરીસભામાં મારા વસ્ત્રોનું હરણ થઇ રહ્યું હતું તે સમયે આપનું ધર્મજ્ઞાન ક્યાં ગયું હતુ? એ વિચાર આવવાથી મને હસવું આવી ગયું. ''

પિતામહે કહ્યુ''દીકરી તું જે વિચારી રહી છે તે બરાબર છે પરંતું સાચી વાત એ છે કે તે સમયે હું દુર્યોધને અન્યાયપૂર્વક ઉપાર્જીત કરેલું કુધાન્ય ખાઇ રહ્યો હોવાથી મારી બુદ્ધી પણ અશુદ્ધ બની ગઇ હતી.મારું મન કુસંસ્કારયુક્ત બની ગયુ હોવાથી અન્યાય વિરુદ્ધ હું બોલી શક્યો નહોતો.

મનુષ્ય જેવું અન્ન ખાય છે તે પ્રમાણે તેની બુદ્ધિ અને મન વ્યવહાર કરે છે.આથીજ શાસ્ત્રોમાં સાધનશુદ્ધિ ઉપર વિશેષ ભાર મુકવામાં આવ્યો છે.મન- બુદ્ધિને વિકૃત કરે તેવાં પકવાન જતાં કરીને અન્યાય વડે ઉપાર્જીત કુસંસ્કારી ધાન્ય કદી ખાવુ જોઇએ નહિ.બુદ્ધિ વિકૃત થવાથી સમગ્ર જીવન વિકૃત થઇ જાય છે.

♠ ગુરૂનું ગુરૂત્વ ♠

એક ગુરૂ અને શિષ્ય તિર્થાાટન માટે જતાં હતાં.ચાલતાં ચાલતાં સાંજ થઇ ગઇ અને બંને એક વૃક્ષ નીચે આરામ કરવા માટે રોકાઇ ગયાં.ગુરૂજી રાત્રે માત્ર ત્રણ-ચાર કલાક ઉંઘતા હતાં અને તેથી તેમની ઉંઘ પણ ઝડપથી પુરી થઇ જતી.તે શિષ્યને જગાડ્યા વગર દૈનિક ક્રિયાઓ પતાવીને પૂજા પાઠમાં વ્યસ્ત થઇ ગયાં.તે દરમિયાન તેમણે એક ઝેરી સાપને પોતાના શિષ્ય તરફ જતો જોયો.ગુરૂજીને પશુ- પક્ષીઓની ભાષા આવડતી હતી તેથી તેમણે સર્પને પ્રશ્ન કર્યો કે, 'ઊંઘી રહેલા મારા શિષ્યને કરડવાની ઇચ્છા છે કે શું?. 'સર્પે તરત જ જવાબ આપ્યો કે, ''મહાત્મા તમારા આ શિષ્યએ પૂર્વજન્મમાં મારી હત્યા કરી હતી.મારે તેનો બદલો લેવો છે.અકાળ મૃત્યુના કારણે મને સર્પયોનિમાં જન્મ મળ્યો.હું તમારા શિષ્યને ડંખ મારીને અકાળ મૃત્યુ પામીશ.''

થોડીવાર વિચાર કરીને ગુરૂજી બોલ્યા,''મારો શિષ્ય અત્યંત સદાચારી અને બુદ્ધિમાન હોવાની સાથે એક સારો સાધક પણ છે.જો તું  તેને મારીને દુનિયાને તેની ક્ષમતા અને પ્રતિભાથી દૂર રાખીશ તો તને આ યોનિમાંથી પણ મુક્તિ મળશે નહિ.''

જો કે સાપ કોઇ પણ રીતે માન્યો નહિ ત્યારે ગુરૂજીએ તેની સામે એક નવો પ્રસ્તાવ રજુ કર્યો.''મારા શિષ્યની સાધના અધૂરી છે.તેણે હજુ આ ક્ષેત્રમાં ઘણું કરવાનું બાકી છે,જ્યારે મારા કામ પૂરા થઇ ગયા છે.મારા મત્યુથી કોઇને નુકસાન નહિ થાય.જેથી તેની જગ્યાએ મને ડંખ માર.''

ગુરૂનો આસ્નેહ જોઇને સાપનું હ્રદય પરિવર્તન થઇ ગયું અને તે તેમને પ્રણામ કરીને જતો રહ્યો.

હકીકતમાં ગુરૂની ગુરૂતા શિષ્યને જ્ઞાન આપવામાં નહિ પણ પૂર્ણ પરિપક્વ થાય ત્યા સુધી તેનુ રક્ષણ કરવામાં છે.

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♥ જીવનામૃત ♥

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દિપક નો પ્રકાશ ઓરડા માં રોશની ફેલાવી રહ્યો હતો. પરંતુ હવે કોડિયામાં તેલ ખુટચા લાગ્યુ હતુ,અને છેવટે એવો સમય આવી ગયો કે બધુ જ તેલ ખલાસ થઈ ગયુ અને વાટ જાતે જ સંકોરાવા લાગી.દિપક નો અંતીમ સમય આવી ગયો તે જાણી કોડિયા ને ખુબ દુ:ખ થયુ અને તેણે સવાલ કયોઁ કે, "ભાઇ દિપક આજીવન પ્રકાશ આપીને તે અનેક લોકોને માગૅ બતાવ્યો છે અને જીવનભર લોકોને પ્રકાશ આપી ભલાઇ નુ કામ કયુઁ છે, છતા તારો આ પ્રકારે અંત જોઈને મને ખુબ દુ:ખ થાય છે. બુઝાઇ રહેલા દિપકે અંતીમ ક્ષણોમાં પોતાના પ્રકાશ ને એકદમ તેજ બનાવી દેતા કહ્યુ, "ભાઈ, આ દુનિયા માં જે આવે છે તેનો અંત નિશ્ચિત છે. આથી ગમે તેટલા પ્રયાસો છતસ બચી શકતુ નથી પરંતુ આપણે એટલુ અવશ્ય કરી શકીએ કે જીવન ની મુલ્યવાન ક્ષણો ને વ્યથૅ નષ્ટ ન થવા દઇએ અને સતત કોઇ ઉપયોગી કાયૅમાં સમય વીતાવી તો અંતીમ સમયે કોઇ દુ:ખ નો અનુભવ થશે નહિ.

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★ लाजवाब शायरियाँ ★

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हम दुश्मनों को भी पाक सजा देते हैं. हाथ नहीं उठाते, बस नज़रों से गिरा देते हैं.
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मेरी यादों की कश्ती उस समुन्दर में तैरती है,
जहाँ पानी सिर्फ और सिर्फ मेरी पलकों का होता है..!!
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"प्यार है हमको आपसे इस कद्र,
जागते है इंतज़ार में अब तो हर पहर, आपके दीदार से होती है हर सहर, और आपके खुमार में उठती है प्यार की लहर"
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खुदको बिखरने मत देना कभी किसी हाल में ,
लोग गिरे हुए मकान की इंटे तक ले जाते है.....!!!
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नही है मेरे पास दौलत का ढ़ेर मगर...
पूरी दुनियाँ को प्यार से खरीदने की ओकात रखता हु..!!
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हमे ना सिखा ज़िंदगी.. हम तुझे भी नाच नचाना जानते है..
दो अठ्ठ्नियाँ जोड़कर.. पाँच बनाना जानते है...
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कुछ लोग इतने गरीब होते हैं...के
उनके पास सिर्फ पैसा होता हैं...!
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जिन्हें जीना हो जीने का, बहाना ढूँढ लेते है,
मुताबिक अपने रहने का जमाना ढूँढ लेते है,
नहीं फँसते शिकंजे में लकीरों के, जिगर वाले,
भले प्रतिकूल हो लहरें, किनारा ढूंढ लेते है।
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तेरे ना होने से बस इतनी कमी रहती है
मैं लाख मुस्कुराऊ, आँखों में नमी रहती है
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भूल गये हो चाहने वालो..??
या..
यादे भी महंगी कर दी सरकारने !!!
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काबिल नज़रो के लिए हम जान भी देदे पर......
कोइ गुरुर से देखे वह हमे मंजूर नही!!
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दुश्मन बनाने के लिए
किसी का बुरा करने कि ज़रूरत नहीं
ख़ुद तरक़्क़ी कर लो तो
दुश्मनों का क़ाफ़िला खड़ा हो जाएगा !!...
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'भाई' बोलने का हक मेने सिर्फ 'दोस्तो' को दिया है क्योंकि
'दुश्मन' आज भी हमे 'बाप' के नाम से पहचानते है...
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Dil ke kehne pe dil ki DUNIYA chhod aaye..
Sabhi RISHTO se muh mod aaye..
Humne na manga hisab WAFA ka yaaro…
Unki CHAHAT mein na jane kitno ke dil TOD aaye..
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मेरी मशविरों की दुकान थी, मनचलों के शहर में,
दूरियां मिटा रहा था, फासलों के शहर में
एक शख्स ने कहा तो था, तूं भूख से मर जायेगा,
तूं किस को इश्क बेचता है, यहाँ दिलजलों के शहर में
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इस कदर हमारी चाहत का इम्तिहान मत लीजिये;
क्यों हो खफा ये बयां तो कीजिये;
कर दीजिये माफ़ अगर हो गयी है कोई खता;
यूँ याद न आकर सज़ा तो न दीजिये।.
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Khuda ek bar use ye ehsas dela de,
kitna intjar hai zara use bata de,
har pal dehkte hai rasta usi ka,
na intjar karna pade
mujhe aisi neend sula de.
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Jis ke liye sab kuch luta diya humne,
wo kehte hai unko bhula diya humne,
gaye the hum unke aansu pochne,
ilzam de diya ki unko rula diya humne..!!
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Usne kaha ke mujhe bhool ja maine tumhe dil se nikal diya hai

bas

Sukoon sa mil gaya ye sunkar kar kabhi to us ke dil mein the hum?
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Badi hseen thi zindgi..
Jab na kisise muhabbt na kisi se nafrat thi!
Zindgi mein ek mod aisa aaya muhabbat usse hui
Aur
Nafrat sari dunia se ho gayi.
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लोग कह्ते है की बीना महेनत कुछ पा नहि सकते
ना जाने ये गम पाने के लिये कौन सी महेनत करली मैने ?
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वो भूल गये की उन्हे हँसाया किसने था
जब वो रुठते थे तो मनाया किसने था

आज वो कहते है कि मैं बहुत खूबसूरत हूँ,
शायद वो भूल गये की उन्हे ये बताया किसने
था.
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अब कहा जरुरत है हाथों मे पत्थर उठाने की, तोडने वाले तो जुबान से ही दिल तोड देते हैं.....
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लाख समझाया के शक करती हे दुनिया मगर
ना गयी आदत उसकी मुस्कुरा के गुजरने की. .
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मुझे रिश्तो की,
लम्बी कतारों से मतलब नहीं...
कोई दिल से हो मेरा ,
तो एक शख्स ही काफी है ....!!
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दुआओ को भी
अजीब इश्क़ है मुझसे .....
वो क़बूल तक नहीं होती
मुझसे जुदा होने के डर से...
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टूट कर बिखर जाते है वो लोग
मिट्टी की दीवारो कि तरह,
जो खुद से भी ज्यादा किसी और से
मुहब्बत किया करते है..
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वो बचपन भी कितना हसीन था, जब सरेआम रोया करते थे....
अब एक भी आँसू गिरे तो लोग हज़ारों सवाल पूछते हैं....!!
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लत " तुम्हारी " लगी थी...
इलज़ाम " शराब" पर आया....
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महसूस जब हो कि सारा शहर, आपसे जलने लगा है,
समझ लेना आपका नाम भी , चलने लगा
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मिली थी जिन्दगी, किसी के काम आने के
लिए...
पर वक्त बित रहा है ,
कागज के टुकड़े कमाने के लिए !
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मेरे दोस्त इतने मशरूफ है
अपने कामो मे..
के अब लगता है,
उनका वक्त भी खरीदना पडेगा
यही कही दुकानो मे....
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फर्क थोडा सा है मेरे और तेरे इश्क मे,
तू माशूक की खातिर रातभर जागता है और मुझे मुल्क के हालात सोने नही देते!
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फट गयी है कमीज रिश्ते की..ग़लतफ़हमियों की कील में फंस के,

सोचता हूँ माफ़ी के धागे से सी दूंगा कभी...
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Duniya Hai Patthar Ki Jazbaat
Nahi Samajhti,
Dil Mein Jo Chhupi Hai Who Baat
Nahi Samajhti!
Chand Tanha Hai Taaro Ki Baraat
Mein,
Dard Magar Chand Ke Zalim Raat
Nahi Samajhti…
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नीलाम कुछ इस कदर हुए,
बाज़ार-ए-वफ़ा में हम आज,,
बोली लगाने वाले भी वो ही थे,
जो कभी झोली फैला कर माँगा करते थे l
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यूँ ही वो दे रहे हैं, क़त्ल की धमकियाँ ...
हम कौन से जिंदा हैं, जो मर जायेंगे .
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आसमान में उड़ने वाले जरा ये खबर भी रख,
जन्नत पहुँचने का रास्ता मिट्टी से ही गुजरता है।।।
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"हुकुम का एक्का कितना भी बड़ा हो ,
रानी हमेशा बादशाह की होती है.,,,,
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Ek Bar Rone sE Tu Mil Jati To Aaj;
Is Dharti Par Tsunami La Dete !!
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Hai pyaar unko hum se itna to yakeen hai hame,
Wo inkar bhi kerti hai to Aankhe sath nahi deti.
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नर्म लफ्जों से भी लग जाती हैं चोटें अक्सर !!
रिश्ते निभाना बड़ा नाज़ुक सा हुनर है !!!
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Afsos to hai tere badal jane ka magar,
Teri kuch baato ne mujhe jeena sikha diya
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प्यार के दो बोल बोलकर खरीद लो मुझे ...
गर दौलत दिखाई तो सारे जहाँ की कम पड़ेगी |।।
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ऐ मोहब्बत, तुझे पाने की कोई राह नहीं;
तू तो उसे ही मिलेगी, जिसे तेरी परवाह नहीं।
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"ये वहम है मेरा कि मुझे बेहोश करती है शराब.....!
होश था ही कब मुझे तुझसे इश्क़ होने के बाद......!!"
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ए नसीब ज़रा एक बात तो बता,
तू सबको आज़माता है या मुझसे ही दुश्मनी है
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रूखी रोटी को भी
बाँट के खाते हुए देखा मैने...
सड़क किनारे का वो भिखारी...
शहंशाहों से भी अम़ीर निकला |।।
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हम से भुलाया ही नहीं जाता एक मुखलिस का प्यार,
लोग जिगर वाले हैं जो रोज नया महबूब बना लेते हैं.
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"एक छुपी हुई पहचान रखता हूँ,
बाहर शांत हूँ, अंदर तूफान रखता हूँ,
रख के तराजू में अपने दोस्त की खुशियाँ,
दूसरे पलड़े में मैं अपनी जान रखता हूं।..
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राह में खतरे भी हैं , लेकिन ठहरता कौन है ,
मौत कल आती है , आज आ जाये , डरता कौन है
तेरे लश्कर के मुक़ाबिल , मैं अकेला हूँ मगर ,
फैसला मैदान में होगा , के मरता कौन ह
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रूठना मत कभी हमें मनाना नहीं आता;
दूर नहीं जाना हमें बुलाना नहीं आता;
तुम भूल जाओ हमें यह तुम्हारी मर्ज़ी है;
हम क्या करें हमें भुलाना नहीं आता।
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एक दिन हम तुम से दूर हो जायेंगे;
अंधेरी गलियों में यूं ही खो जायेंगे;
आज हमारी फिक्र नहीं है आपको;
कल से हम भी बेफिक्र हो जायेंगे।.
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कोई ताबीज ऐसा दो की मैं चालाक हो जाऊं,
बहुत नुकसान देती है मुझे ये सादगी मेरी ।
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वो फिर आ मिले हमसे अपने फायदे के लिए..
और हम नादान समझे
कि हमारी मनन्तो का असर है!!
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बाजार के रंगों से रंगने की मुझे जरुरत नहीं ...
किसी की याद आते ही ये चेहरा गुलाबी हो जाता है
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क्या अजीब सबूत माँगा है उसने मेरी मोहब्बत का..
मुझे भूल जाओ तो मानू की तुम्हे मुझसे मोहब्बत
है........!
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जिँदगी से आज तक हमनें कुछ उधारनही लिया...
कफन भी लेंगे तो 'जिँदगी' देकर...
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खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की,
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है..
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हीरे की काबिलियत रखते हो तो, अँधेरे में चमका करो...!
रौशनी में तो कांच भी चमका करते है ....!!!
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जब चलना नहीं आता तो गिरने नहीं देते थे लोग
जब से संभाला खुद को कदम कदम गिराने की सोचते है लोग...
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Ek tamanna si hai iss maayoos dil ki kash...
Aaj aansoo ke sath har khwaab bhi beh jaye...
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Khamoshiyan takra kar vanha se chupchap chali aati he,
Vahan pe hamne kabhi ek chikh dafanaiii thi...
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भले थे तो किसी ने हाल तक नहीं पूछा,
बुरे बनते ही देखा हर तरफ अपने ही चर्चे है.!!
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क्या हुआ अगर जिंदगी में"हम"तन्हा है ???
लेकिन इतनी अहमियत तोदोस्तो में बना ही ली है कि...
"मेला लग जायेगा उस दिन शमशान में,
जिस दिन"मैँ"चला जाँऊगा आसमान में"!
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हमारी शक्सियत का अंदाज़ा तुम क्या लगाओगे गालिब,
के हम तो कब्रीस्तान सेभी गुज़रते हैतो
मुर्दे उठ कर कहते है"भाई सलाम"...
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हमने कभी नहीं चाहा कि हमें इश्क हो ,
पर उनकी एक नज़र ने हमें नीलाम कर दिया  l
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कभी मोहब्बत कर्ज़ में ली थी तुझसे,
नींदों की ज़मानत अभी तक जप्त है.
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तलब करे तो,मैं अपनी आँखें भी उन्हें दे दूँ..मगर ये लोग, मेरी आँखों के ख्वाब मांगते हैं
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♥ માનવતા ♥

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વારંવાર બેલ વગાડવા છતાં સાહેબ ની ઓફિસ માં જો પટાવાળો હાજર ન થાય તો સાહેબ ની પ્રતિક્રિયા કેવી હસે તે આપ સૌ જાણો છો પરંતુ જર્મની ના સમ્રાટ ફ્રેડરિક નો પ્રસંગ ઘણું બધુ કહી જાય છે.

એક વાર સમ્રાટ ફ્રેડરિકે ચપરાસી ને બોલાવવા ઘણી બધી વાર ઘંટડી વગાડી પણ કોઈ આવતું નહોતુ આથી છેવટે રાજાએ જાતે ઊભા થઈ ને બહાર નજર કરી તો બહાર ચપરાસી બેઠા બેઠા ત્યાં સુઈ ગયો હતો અને તેના હાથ માં એક પત્ર હતો સમ્રાટે તે પત્ર જોયો. નોકર ની વિધવા માતા નો પત્ર હતો જે પત્ર માં તેની માતા એ તેની કથળી ગયેલી હાલત નું વર્ણન કર્યુ હતું. અને પોતાને પડતી મુશ્કેલીઓ જણાવી મદદ કરવા કહ્યું હતું.
પરંતુ ચપરાસી નિસહાય હતો અને ખુબ થાકેલો હોવાથી પોતે ભુલી ગયો કે પોતે હાલ ડ્યુટી પર છે.
વૃદ્ધ માતા નો પત્ર વાંચી ને સમ્રાટ ની આંખ મા પણ આંસુ આવી ગ્યા. તેમણે ધીમે રહી નોકરના ખિસ્સા માં જરૂરી પૈસા મુકી દીધા. જેથી તેની માતાને મોકલાવી શકે અને ધીરે રહીને પોતાના રૂમમાં જતા રહ્યા જાણે કઈ બન્યું જ નથી .
સમ્રાટપણુ બતાવાની આવી પણ રીત હોઈ શકે.

♥ બોધ :-

→ માનવતા જ વ્યક્તિ ને મહાન બનાવે છે. જરૂરિયાત વ્યક્તિની મદદ કરવી એ દરેક મનુષ્યની ફરજ બની રહે છે.

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♥ ARPIT SUTHAR ♥

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